अक्स – ऐ – मोहब्बत

अक्स – ऐ – मोहब्बत

सारे ज़माने का नशा तेरी झील सी आंखों में है,
हमारा जीना – मरना सब, तेरी महकती सासो में है;

बेरंग सी जिंदगी हमारी क्यो?, पुछा जब फरिश्तों से,
जवाब आया की, दुनिया में रंग भरने का कारोबार तेरे हाथो में है;

सूरज भी रोशन है, तेरे चेहरे के नूर से,
ये राते काली तेरे घने काले बालों से है;

ये बारीश तो बस नाम की है, तूने झटक दिए होंगे गीले बाल कहीं,
तेरे लगाएं इत्र की खुशबू, बह रही इन हवाओं में है,

कुछ पीला दे ऐसा की सब भूल जाऊ साकी,
तुझे भुला सके, ऐसा नशा कहा शराबो में है;

मेरी हक़ीक़त में तू नहीं, कोई गम नहीं,
तू मेरी हर ख्वाबों भरी तनहा रातों में है;

इश्क़ हो, पर इजहार ना हों,
मिलने में नहीं, मोहब्बत का मजा तो बिछड़ जाने में है।।

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