अगर मै इज़हार कर देता….

अगर मै इज़हार कर देता….

यू गुमनाम ना होता, किसी तारीफ का मोहताज ना होता;
किस्से हमारे भी सुने जाते, शहर में मशहूर हो जाते;
फिर कोई ग़म ना होता, ना टिस दिल में होती;
वो भी मशहूर हो जाते, अगर मै इज़हार कर देता।।

यू तनहा ना रह जाता सफ़र जिंदगी का;
हमसफ़र कोई साथ हमारे होते;
बहारो से भरा होता, रास्ता यू वीरान ना होता;
वो भी मुसाफ़िर हो जाते, अगर मै इज़हार कर देता।।

दोस्त हमसे नाकामी-ऐ-इश्क का सबब पूछते हैं;
अब महफ़िल में दिलो के बताएं राज़ क्या;
मिजाज़ से हमारे, हम तो यू ही बदनाम थे;
वो भी बदनाम हो जाते, अगर मै इज़हार कर देता।।
वो भी बदनाम हो जाते, अगर मै इज़हार कर देता।।

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