बे मंज़िल सफ़र
अकेला नहीं राह में, मेरे सपने हमसफ़र हैं,
बे मंज़िल ही सफर सही, पर राह मै भटका नहीं,
मुसाफ़िर मिलते है बहुत, हमसफ़र नहीं मिलते,
बिन हमसफ़र का, बे मंज़िल सफर है।।
मेरे रास्ते जुदा है, मेरी चाहत से,
मैं चलता जा रहा, अनसुनी आहट से,
जिंदगी का दोराहा है मिलता, राह नहीं मिलती,
बिन राह का, बे मंज़िल सफर हैं।।
बे राह, बे हमसफ़र, बिन मंज़िल सही मेरा सफर,
मैं अकेले चलूंगा, अंत तक चलूंगा,
ना मिले मंज़िल लाख सही, पर मैं एक दिन खुद से मिलूंगा,
खुद की तलाश का, बे मंज़िल सफर है।।
खुद की तलाश का, बे मंज़िल सफर है।।