आदते शहर की…

आदते शहर की…

आदतें शहर की मुझे अब भी नहीं भाती ।।

देर तक सोता है सुबह, रातो को इसे नींद नहीं आती ।।

पक्की है सड़कें, यहां दिल तक किसी के कोई राह नहीं जाती ।।

मकान बड़े है बहुत, रिश्तो को मगर सहेज नहीं पाते ।।

भुका ही सो गया कोई सड़क के किनारे, भर पेट खा कर भी किसी को नींद नहीं आती ।।

आदतें शहर की मुझे अब भी नहीं भाती ।।

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