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Category: हिंदी कविता

अश्वमेध यज्ञ

अश्वमेध यज्ञ

भरो उड़ान, की ये आसमान तुम्हारा है,करो सृजन, हर साधन तुम्हारा है,इच्छित गंतव्य का, पथ घोर कठीन है,लड़ो, की अब ये संघर्ष तुम्हारा है।।1।। क्षितिज को छुना है, नक्षत्र तोड़ लाने है,यही तो बस प्रण तुम्हारा है,क्या भला, क्या बुरा सब बीत जाएगा,उम्मीद रखो, की आने वाला यह वक्त तुम्हारा है।।2।। बिन विफलता, क्या सफलता?,यदी मनोबल, शीखर सम ऊंचा तुम्हारा है,प्रयत्न जारी बस तुम रखो,वो रात तुम्हारी थी, ये दिन भी तुम्हरा है।।3।। अविरत चलना, गुण धारा का,यह गुण धरो,…

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अर्जुन शस्त्र उठाओ

अर्जुन शस्त्र उठाओ

महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन ने शस्त्र त्याग कर युद्ध ना करने का निर्णय लिया, तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें पुनः युद्ध के लिए सज्ज करने हेतु क्या कहा होगा, उसी पार्श्वभूमी पर लिखी गई कविता “अर्जुन शस्त्र उठाओ….” हो धीर, धर धनु धनंजय[1];उठा बाण, कर संधान लक्ष्य पर,मत भूल जो आघात हुए तव वक्ष पर,इन अपनों में, गैरो को पहचानो,लाक्षागृह की षड्यंत्रकारी आग ना भूलो,अर्जुन शस्त्र उठाओ।। द्यूत क्रीड़ा[2] में पासो का पक्षपात,दुर्योधन का वह अहंकारी हास,अंगराज(कर्ण)…

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यह देश हम सबका है..

यह देश हम सबका है..

तुम्हारे इस उत्पात में,तुम्हारा अज्ञान, तम, राजनैतिक स्वार्थ,सब समाहित है,तुम्हारे इस राष्ट्र – द्वेष में,तुम्हारा ही अहित समाहित है।।1।। किस बात का दंभ तुम्हे,व्यर्थ ही का है घमंड तुम्हे,मिले समय तो, इतिहास का दर्पण देखो,अपने जग – उपेक्षित पूर्वजों का ध्यान करो,जिस भूमि ने आश्रय दिया, उसका तो लिहाज करो।।2।। सरहद पार से आए आदेशो का,शब्दशः अनुपालन जो करते,इंकलाब के नारों पर, जो झंडा पाक का फैराते,इस फूलों की बगिया में, येसे बबूल ना फलने देगे,संघर्ष तो बस इसी बात…

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मेरा एक घर है गांव में

मेरा एक घर है गांव में

यू दर दर भटकता, मुकद्दर की फ़िक्र करतामुसाफिर हूं मैं इस शहर में, कभी वापस लौट जाऊंगासफर पर निकला हूं, अनजानों संग नाव मेंआशियानो की फ़िक्र नहीं मुझे, मेरा एक घर है गांव में।।1।। हर ग़म से बेखबर था, मां के आंचल की जबतलक छाव थीहाथ छूटते ही उसका, मुसीबतों से घिर गया मैंखुले आसमान उड़ता था कभी, अब बेड़ियां हैं पांव मेंपिंजरों में रहने की आदत नहीं मुझे, मेरा एक घर है गांव में।।2।। तनहा सा लगता हूं, इस…

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अंतर-द्वंद

अंतर-द्वंद

अंजान डगर, अंजान सफ़र;ना खुद की, ना मंजिल की खबर।। ना शब्द से शब्द मिलता, ना काफिया मिलता कहीं;गैर मिलते हर मोड़ पे यहां, ना अपना मिला कोई।। खुद को ढूंढू या खुदा को, समझ नहीं आता;जमाने भर से मिलता हूं, खुद से मिल नहीं पाता।। वो मेरे सपनों की राह न चली;जिंदगी गज़ब की बेवफा निकली।। गिरता, संभलता, लड़खड़ाता कभी;सिख रहा हूं जीने का सबक जिंदगी से।। खुद से शिकायत, खुद ही से शिकवा;मेरा यह युद्ध, है मेरे ही…

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