एक बार फिर से प्रतिशोध चाहता है देश
विकट हैं वक्त, विलाप कर रही मां भारतीअपनों के विच्छेदित शव समेट रहा है देशमातृ भूमि के विरो संग न्याय होना चाहिएहर एक शहादत का हिसाब चाहता है देशएक बार फिर से प्रतिशोध चाहता है देश।।1।। साबुत गए थे जो, खंड विखंड हो आऐ हैंक्षित विक्षित पुत्र का अंतिम दर्शन चाहती हैं मांचलना सिखाया जिसे, उसिकी अर्थी को कंधा दे रहा पिताशत्रुओ के घर भी मातम चाहता है देशएक बार फिर से प्रतिशोध चाहता है देश।।2।। उजड़ी हुई मांगो का,…