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Category: हिंदी कविता

एक बार फिर से प्रतिशोध चाहता है देश

एक बार फिर से प्रतिशोध चाहता है देश

विकट हैं वक्त, विलाप कर रही मां भारतीअपनों के विच्छेदित शव समेट रहा है देशमातृ भूमि के विरो संग न्याय होना चाहिएहर एक शहादत का हिसाब चाहता है देशएक बार फिर से प्रतिशोध चाहता है देश।।1।। साबुत गए थे जो, खंड विखंड हो आऐ हैंक्षित विक्षित पुत्र का अंतिम दर्शन चाहती हैं मांचलना सिखाया जिसे, उसिकी अर्थी को कंधा दे रहा पिताशत्रुओ के घर भी मातम चाहता है देशएक बार फिर से प्रतिशोध चाहता है देश।।2।। उजड़ी हुई मांगो का,…

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आदते शहर की…

आदते शहर की…

आदतें शहर की मुझे अब भी नहीं भाती ।। देर तक सोता है सुबह, रातो को इसे नींद नहीं आती ।। पक्की है सड़कें, यहां दिल तक किसी के कोई राह नहीं जाती ।। मकान बड़े है बहुत, रिश्तो को मगर सहेज नहीं पाते ।। भुका ही सो गया कोई सड़क के किनारे, भर पेट खा कर भी किसी को नींद नहीं आती ।। आदतें शहर की मुझे अब भी नहीं भाती ।।

मैं भूल जाऊंगा….

मैं भूल जाऊंगा….

जिम्मेदारियां ही रास्ता सपनों का काट जाती है,वरना, कोई तूफानों से लडने का जज़्बा लिए,किनारों पर रेत का घर क्यो बनायेगा।। हमारे ज़मीर से है रिश्ता उसका,हमारा ही बदला है पता शायद,दिल अब भी गाव के उसी घर में रहता हैं।। मुझे शिक़ायत करनी थी,की, आज खाना अच्छा नहीं बना,फिर याद आया, यहां मां नहीं रहती।। घर कब जाइएगा, की ये अब त्यौहार बताते हैं,शुकर है, दिल की ज्यादा नहीं चलती,वो राज़ी है, दिवाली हर महीने मनाने को।। कोई पूछेगा…

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अभी लिखना बाक़ी है….

अभी लिखना बाक़ी है….

क्यों कलम रोक दू?, लिखने का प्रण त्याग दू!;उपहास के भयवश, सत्य से मुंह मोड़ लू?;अभी तो छंद लिखे है, नौ रस लिखना बाक़ी है;मैंने बस विरह लिखा, अभी मिलन का उत्सव लिखना बाक़ी है।। शब्द मेरे, निज़ व्यथा का मुखर साक्ष है;मुक्तक-मुक्तक मेरे सुख – संघर्ष की बात कहें;अभी तो एक क्षण लिखा है, सारा जीवन लिखना बाक़ी हैं;मैंने बस स्व [1] लिखा, अभी सारा संसार लिखना बाक़ी है|| लिए स्वप्न भोर के आंखो में, अतृप्त भटक रहा;नित्य प्रयोग…

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बे मंज़िल सफ़र

बे मंज़िल सफ़र

अकेला नहीं राह में, मेरे सपने हमसफ़र हैं,बे मंज़िल ही सफर सही, पर राह मै भटका नहीं,मुसाफ़िर मिलते है बहुत, हमसफ़र नहीं मिलते,बिन हमसफ़र का, बे मंज़िल सफर है।। मेरे रास्ते जुदा है, मेरी चाहत से,मैं चलता जा रहा, अनसुनी आहट से,जिंदगी का दोराहा है मिलता, राह नहीं मिलती,बिन राह का, बे मंज़िल सफर हैं।। बे राह, बे हमसफ़र, बिन मंज़िल सही मेरा सफर,मैं अकेले चलूंगा, अंत तक चलूंगा,ना मिले मंज़िल लाख सही, पर मैं एक दिन खुद से मिलूंगा,खुद…

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