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Category: हिंदी कविता

कर्म युद्ध

कर्म युद्ध

हो समर का वीर तू, शुल तू, तलवार तू;मध्य रण के आ जरा, समय को ललकार तू;विपरीत हो परिस्थिति, या हो चाहें पूर्ण जगती[1];तू डिगे नहीं, तू रुके नहीं, यही तेरा संकल्प हो;हो तेरी ही विजय, समय की हार होनी चाहिएं;यह समय रहे ना रहे, तेरा अस्तित्व रहना चाहिए।।1।। कर्म के युद्ध में, जब धर्म के तुम साथ हो;कौरव कैसे जीते?, जब कृष्ण पार्थ के साथ हो;तू शील[2] हो, तुझमें दया – क्षमा का भाव हो;यदि तुम रथी नीति रथ…

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ललकार युद्ध की..

ललकार युद्ध की..

जयघोष गूंजे “हर हर महादेव” का, हर शंख समर का फूंक दो, शत्रु से कह दो, शरणागत हो, या फिर मरने की तैयारी हो, अब हमने सीमोल्लंघन(सीमा उलंघन) की ठानी है, अरे आयुध सजा दो सीमा पर, भारत मां के बेटों ने, अब तांडव करने की ठानी है।।1।। यदि अबके, हम उतरे रणभूमि में, तो खाली हाथ ना लौटेंगे, या तो लेंगे विजयश्री, या वीरगति ही लेकर लौटेंगे, बहुत पढ़ चुके पाठ प्रेम का, ये सब तो नादानी है, हर…

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मिजाज़-ऐ-जिंदगी

मिजाज़-ऐ-जिंदगी

वो वक्त पर आए तो, मौसम का मिजाज़ बदल जाती है; पर बेवक्त की बारिश, अकसर फसले उजाड़ देती है।।1।। मेहनत की कमाई, कभी ना कभी जिंदगी सवार ही देती है, बेईमानी से मिली शोहरत, आने वाली नस्लें बिगाड़ ही देती हैं।।2।। वो अपने गम नहीं बताता, उसकी मुस्कान ही दिखाई देती है, बेटी की बिदाई मगर, बाप को रुला ही देती है।।3।। नींद भी गरीबों से बेईमानी करती है, वो भुखे हो तो उनके घर नहीं जाती, मांगते है…

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