हालात-ऐ-वतन सुधर जाएंगे
अब यही रुकेंगे, और खैर मनाएंगे; बंद है रास्ते हर तरफ, बताओ कहा जाएंगे? गनीमत है, हमारे अपने है इस शहर में; मगर जो बेघर है, सोचो वो गरीब कहा जाएंगे? खुशनसीब हो दोस्त, एक घर है तुम्हरा; ये पेड़ जो टूटा, तो पंछी कहा जाएंगे? घर ने बुलाया भी हमको, पर हम नही लौटे; भरम में थे, की हालात-ऐ-शहर सुधर जाएंगे।। हमे लेकर फिकरमंद ना होना, हम सलामत है; पाबंदियों हटते ही, कुछ दिनो के लिए घर लौट आएंगे।।…