हालात-ऐ-वतन सुधर जाएंगे

हालात-ऐ-वतन सुधर जाएंगे

अब यही रुकेंगे, और खैर मनाएंगे;
बंद है रास्ते हर तरफ, बताओ कहा जाएंगे?

गनीमत है, हमारे अपने है इस शहर में;
मगर जो बेघर है, सोचो वो गरीब कहा जाएंगे?

खुशनसीब हो दोस्त, एक घर है तुम्हरा;
ये पेड़ जो टूटा, तो पंछी कहा जाएंगे?

घर ने बुलाया भी हमको, पर हम नही लौटे;
भरम में थे, की हालात-ऐ-शहर सुधर जाएंगे।।

हमे लेकर फिकरमंद ना होना, हम सलामत है;
पाबंदियों हटते ही, कुछ दिनो के लिए घर लौट आएंगे।।

जहा भी रहों, कायदे में रहना;
और दुआ करना, तभी हालात-ऐ-वतन सुधर पाएंगे।।

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