शब्द
शब्द ही शर[1] है,
शब्द ही फूल,
कभी शूल[2] तो,
कभी निश्चय का मूल।।1।।
शब्द ही अवि[3] है,
शब्द ही अरि[4],
कभी अवी[5] तो,
कभी चंद्र की ओज।।2।।
शब्द ही फल है,
शब्द ही पेड़,
कभी उत्सव तो,
कभी नीज का शोक।।3।।
शब्द ही सीमा,
शब्द ही संवेग,
कभी सुख तो,
कभी नीज़ का शोध।।4।।
- शर : तीर, बाण
- शूल : कांटा
- अवि : रक्षक, स्वामी
- अरि : शत्रु
- अवी : सूर्य