अक्स – ऐ – मोहब्बत

अक्स – ऐ – मोहब्बत

सारे ज़माने का नशा तेरी झील सी आंखों में है,हमारा जीना – मरना सब, तेरी महकती सासो में है; बेरंग सी जिंदगी हमारी क्यो?, पुछा जब फरिश्तों से,जवाब आया की, दुनिया में रंग भरने का कारोबार तेरे हाथो में है; सूरज भी रोशन है, तेरे चेहरे के नूर से,ये राते काली तेरे घने काले बालों से है; ये बारीश तो बस नाम की है, तूने झटक दिए होंगे गीले बाल कहीं,तेरे लगाएं इत्र की खुशबू, बह रही इन हवाओं में…

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तब, मैंने लिखें गीत कई

तब, मैंने लिखें गीत कई

भरे रंग बहारो ने,खिली बगिया जब पतझड़ बाद कई,केवल सृजन था, ना प्रलय कहीं,जब मैंने पाए गैरो में मीत कहीं,तब, मैंने लिखें गीत कई।।1।। शोहरत ना थी, ठीक सही,पर हर अपना साथ हमारे था,सबकुछ खो कर भी,था जब मैं निस्वार्थ खड़ा,तब, मैंने लिखें गीत कई।।2।। ना टिस हृदय में, ना कसक कहीं,भुलाकर हर किस्सा, लिखी है अब ग़ज़ल नई,अपना ना सही, पर औरों का,जब देखा होते, सफल प्रेम कहीं,तब, मैंने लिखें गीत कई।।3।। जमाना गम औरों के बाटे ना,अब तो…

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तब, मैंने मिटाएं लिखकर गीत कई

तब, मैंने मिटाएं लिखकर गीत कई

लिखें थे अंतर्मन के छंद कई, द्वंद कई,कुछ सृजन के, कुछ प्रलय के अनुभव कई,कहीं प्रेम, था नीरस कहीं, तब कहीं रसपुर्ण विरह सही,यू ढूंढ़ कर भी ना मिले, अपनों में जब मीत कहीं,तब, मैंने मिटाएं लिखकर गीत कई।। कुछ पाने का कहा स्वार्थ था,ना भय कुछ खोने का था,फिर भी जो पाया, वो अपने श्रम से था,सब अर्जित कर भी, जब खुद को पाया एकांकी,तब, मैंने मिटाएं लिखकर गीत कई।। आवेग शून्य था,जब शब्दों का मुझको था ज्ञान नहीं,वो…

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शौर्य कहा से लावोंगे

शौर्य कहा से लावोंगे

जो तुम्हारे खून में नहीं,तुम वो खुद्दारी कहा से लावोगे,ले आवोगे तुम, लाखो आतंक परस्त माना,पर हमसा राष्ट्रप्रेमी कलाम कहा से लावोगे।। तुम लिए कटोरा हाथ,जगभर में हो भीख मांग रहे,माना कि, चरित्रहीन जिन्ना, तुम ले आवोंगे,पर हमसा दिलेर भगत सिंह कहा से लावोगे।। जो हमने तुमको दी ही नहीं,राणा की, तुम वो तलवार कहा से लावोंगे,अपने विदेशी बापो से,तुम शस्त्र भलेही ले आओ,पर शेरों से लडने का, शौर्य कहा से लावोंगे।।पर शेरों से लडने का, शौर्य कहा से लावोंगे।।

अगर मै इज़हार कर देता….

अगर मै इज़हार कर देता….

यू गुमनाम ना होता, किसी तारीफ का मोहताज ना होता;किस्से हमारे भी सुने जाते, शहर में मशहूर हो जाते;फिर कोई ग़म ना होता, ना टिस दिल में होती;वो भी मशहूर हो जाते, अगर मै इज़हार कर देता।। यू तनहा ना रह जाता सफ़र जिंदगी का;हमसफ़र कोई साथ हमारे होते;बहारो से भरा होता, रास्ता यू वीरान ना होता;वो भी मुसाफ़िर हो जाते, अगर मै इज़हार कर देता।। दोस्त हमसे नाकामी-ऐ-इश्क का सबब पूछते हैं;अब महफ़िल में दिलो के बताएं राज़ क्या;मिजाज़…

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